दिल की चाहत

तुझसे मिलने की दिल मे चाहत बढ़ी है,
जब से तू मुझसे दूर गयी है।
इस दिल की तड़पन सिर्फ तू ही जान सकती है,
क्योकि तेरे दिल मे सिर्फ हम ही बसते है।

ये तड़पन भी लगती जैसे एक सज़ा है,
मगर जिंदगी का यही तो मज़ा है।
ना जाओ मुझसे दूर ओ प्रियतम,
तुझसे मेरा प्यार न होगा कभी कम।

इस दिल की बेकरारी बस तेरी यादें
सताती है ।
कैसे समझाऊ इस दिल को मैं यारा
इस दिल मे तो तू ही बसती है।

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