बना हूँ मैं शायर करके प्यार

इश्क़ अक्सर लोगो को शायर बना देता है,
तो भाई हम कैसे पीछे रह सकते है
लो हम भी शायर बन जाते है
ओर करते है इजहार ,
हो गई है तुमसे प्यार ।।।

जब से मिला हु तुमसे ,
कैसे कहूँ इस  दिल की क्या आलम है,
हम तो यही है,
मगर दिल तेरे यादों के साथ है।

सुबह का सुनहली धूप मे
बस तेरा इंतेज़ार है।
हाथ थामे चलू तेरा
बस ऐसी एक जज्बात है।

किसी असीमित राहों में
साथ निकल पडूँ मैं
तेरा उंगुलियों में उलझाए अपनी हाथ
असीमित बातों के सफर में
बस तेरा हो साथ।

सुनो ए रस्म रिवाजो वाले
इस इश्क़ में न होगा कोई दीवार
बना हूँ मैं शायर करके प्यार।
बना हूँ मैं शायर करके प्यार।।।

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